चक्रवात स्थल की ओर जाते ही कमजोर क्यों हो जाता है? What is Cyclone? चक्रवात क्या है? कैसे बनता है, इसके कितने प्रकार हैं?
अभी हाल ही में हमने देखा कि बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात 'Arnab' और 'Murasu' से तटीय क्षेत्रों में कितनी क्षति हुई! तेज हवाएँ चलीं; भारी बारिश हुई; बाढ़ आ गई; फसलें नष्ट हो गईं! इस चक्रवात का असर देश के अन्य हिस्सों पर भी बना रहा, जिससे बहुत से स्थानों पर भारी बारिश और तेज हवाएँ चलती रहीं।
आखिर ये चक्रवात (Cyclone) क्या है, ये कैसे बनता है? यहाँ हम जानेंगे कि चक्रवात आखिर जमीन पर आते ही धीमा कैसे होने लगता है? समुद्र में बने कम दबाव के क्षेत्र जो धीरे-धीरे एक चक्रवात का रूप ले लेते हैं, उनकी गति बढ़ती जाती है और वे स्थल की तरफ बढ़ने लगते हैं। समुद्र में गति अति तीव्र होती है जो तटीय क्षेत्रों से टकराने पर भारी तबाही का कारण बनती है। ये धीरे-धीरे स्थल की ओर आगे बढ़ते हैं और कमजोर होकर समाप्त हो जाते हैं।
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1. चक्रवात क्या है?
चक्रवात एक ऐसी घटना है जिसमें एक कम वायुदाब का केंद्र (Low Pressure Center) होता है, जिसके चारों ओर उच्च वायुदाब की हवाएँ गोल आकार में घूमने लगती हैं और अपने साथ बादल, भारी बारिश, और 150 से 250 km/h तक की गति से हवाएँ लेकर आता है। शुरुआत में ये बहुत धीमा होता है, लेकिन जैसे-जैसे केंद्र का वायुदाब कम होने लगता है, उच्च वायुदाब की हवाएँ केंद्र की ओर तेजी से बढ़ने लगती हैं और गोल आकार में घूमने लगती हैं, जिससे गति धीरे-धीरे तीव्र होने लगती है।
2. चक्रवात कैसे बनता है?
जब पृथ्वी के किसी क्षेत्र के वायुमण्डल का तापमान बढ़ने लगता है, तब हवाएँ गर्म होकर ऊपर उठने लगती हैं जिससे उस क्षेत्र में एक निम्न वायुदाब (Low Pressure) का क्षेत्र विकसित हो जाता है। उच्च वायुदाब की हवाएँ, निम्न वायुदाब की ओर बढ़ने लगती हैं। पृथ्वी के गोल होने, इसके घूर्णन (Rotation) और साथ में 'कोरिओलिस बल' (Coriolis Force) के कारण हवाएँ सीधी ना चलकर गोल घूमने लगती हैं।
3. कोरिऑलिस प्रभाव (Coriolis effect) क्या है?
कोरिऑलिस नाम एक French वैज्ञानिक के नाम पर पड़ा है। इसकी व्याख्या इन्होंने 1844 ई. में की थी।
"पृथ्वी के घूमने के कारण हवाएँ अपनी वास्तविक दिशा (Direction) से मुड़कर चलने लगती हैं, इसे 'कोरिऑलिस प्रभाव' कहते हैं।"
इस बल के कारण उत्तरी गोलार्द्ध (Northern Hemisphere) और दक्षिणी गोलार्द्ध (Southern Hemisphere) में चलने वाली हवाओं की दिशा इस प्रकार होती है —
- उत्तरी गोलार्द्ध में हवाएँ दायीं ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मुड़ जाती हैं।
- Equator (विषुवत वृत्त) पर कोरिऑलिस बल का प्रभाव शून्य होता है।
यदि कोरिऑलिस प्रभाव ना होता, तो हवाएँ कम दबाव के क्षेत्र में आकर सीधे ही समा जातीं और चक्रवात नहीं बनता।
उत्तरी गोलार्द्ध में चक्रवात घड़ी की सुइयों की दिशा के विपरीत यानी Anticlockwise बनता है, और दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सुइयों की दिशा में यानी Clockwise बनता है।
4. चक्रवात के प्रकार (Types of Cyclone)
चक्रवात मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं — उष्णकटिबंधीय चक्रवात और शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात।
उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclone)
ये कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच बनने वाला चक्रवात है। ये चक्रवात उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के महासागरों पर विकसित होते हैं, जो अति विनाशकारी होते हैं। ये तटीय क्षेत्रों की ओर गति करते हैं और अपने साथ अत्यधिक वर्षा, तूफान एवं तेज हवाएँ लेकर आते हैं।
'उष्णकटिबंधीय' का अर्थ गर्म पट्टी अथवा गर्म क्षेत्र होता है। उष्ण का अर्थ गर्म और कटिबंध का अर्थ क्षेत्र या पट्टी, वैसे ही शीतोष्ण का मतलब ठंडा होता है।
उष्णकटिबंधीय चक्रवात दुनिया के अलग-अलग महासागरों में इन्हें अलग नामों से जाना जाता है:
- हिंद महासागर में — चक्रवात (Cyclone)
- अटलांटिक महासागर और पूर्वी प्रशांत महासागर में — हरिकेन (Hurricane)
- पश्चिमी प्रशांत महासागर और चीन सागर में — टाइफून (Typhoon)
- ऑस्ट्रेलिया में — विली-विली (Willi-willi)
बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात भी उष्णकटिबंधीय चक्रवात की श्रेणी में ही आता है।
शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात (Extra-tropical Cyclone)
ये शीतोष्ण क्षेत्र में उत्पन्न होता है। उष्णकटिबंधीय से दूर मध्य और उच्च अक्षांशों पर विकसित होता है। ये उतना आक्रामक नहीं होता जितना कि उष्णकटिबंधीय चक्रवात होता है। खास बात ये है कि उष्णकटिबंधीय चक्रवात केवल गर्म समुद्र पर बनता है, लेकिन शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात दोनों जगहों (स्थल और समुद्र) पर बन सकता है।
शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात, दो विपरीत हवाओं के टकराव से बनता है। विषुवत (Equator) से चलती गर्म हवाएँ और दोनों ध्रुवों से चलती ठंडी हवाओं के मिलने से एक रेखा बनती है जिसे 'वाताग्र' (Front) कहते हैं। जब गर्म और ठंडी हवाएँ मिलती हैं, तो एक तरंग जैसी स्थिति (Wave) जनरेट होती है जिससे कम दबाव का क्षेत्र विकसित होता है और शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात बनता है।
इस चक्रवात का दायरा हज़ारों किलोमीटर तक हो सकता है। इसके प्रभाव से कोई बड़ा चक्रवाती रूप नहीं बनता, बल्कि आसमान में बादल छाए रहते हैं, हल्की बारिश कई दिनों तक होती है और बर्फबारी होती है। पछुआ हवाओं के कारण ये चक्रवात हमेशा पश्चिम से पूर्व की ओर आगे बढ़ते हैं।
गर्म व ठंडी हवाओं के चलते इससे अचानक कहीं तापमान ठंडा तो कहीं गर्म हो जाता है।
उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के कारण भारत में शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात सीधे तौर पर नहीं बनता, लेकिन इसका असर 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) के कारण देखने को मिलता है। सर्दियों में इसका असर उत्तरी भारत में रबी की फसल के समय देखने को मिलता है, जिसमें हल्की से मध्यम वर्षा होती है जो फसलों के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहती है।
5. स्थल पर चक्रवात कमजोर क्यों हो जाता है?
चक्रवात जब समुद्र से चलकर स्थल की ओर आता है, तो धीरे-धीरे स्थल के अंदर जाने पर कमजोर होने लगता है; जिसे चक्रवात का लैंडफॉल (Landfall) कहते हैं।
जब ये चक्रवात समुद्र में होता है, तो संघनन (Condensation) के कारण ये और अधिक विनाशकारी होता जाता है। संघनन से ही कपासी बादल बनते हैं जो चक्रवात के केंद्र को घेरे रहते हैं, साथ ही समुद्र से निरंतर नमी मिलती रहती है जिससे चक्रवात और भी आक्रामक हो जाता है।
जब यह चक्रवात स्थल पर पहुँचता है, तो इसको नमी मिलना बंद हो जाती है; जिससे चक्रवात धीमा होने लगता है।
समुद्र में खुला व समतल क्षेत्र होने के कारण हवाएँ बिना किसी रुकावट के तेजी से घूमती हुई आगे बढ़ती हैं। वहीं स्थल पर विविध अवरोध, जैसे — पहाड़, पेड़, मकान, उबड़-खाबड़ भू-भाग आदि होते हैं, जिनसे हवाएँ टकराकर धीमी पड़ जाती हैं और अंततः चक्रवात समाप्त हो जाता है।
6. बंगाल की खाड़ी में अधिक चक्रवात क्यों बनते हैं?
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण तापमान का है। बंगाल की खाड़ी में औसत तापमान हमेशा 27°C से ऊपर रहता है, जिससे हवाएँ तेजी से गर्म होकर ऊपर उठती हैं।
इसके अलावा, गंगा, ब्रह्मपुत्र जैसी बड़ी नदियों का मीठा जल बंगाल की खाड़ी में गिरने से समुद्री खारापन (Salinity) प्रभावित होता है, जो सतह के तापमान में वृद्धि का एक मुख्य कारण बनता है और चक्रवातों के अनुकूल वातावरण तैयार करता है।

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