Skip to main content

रोड/सड़क क्या है? इसके प्रकार | Types of Road, Milestone, Road Markings

सड़क:



अगर आप सड़कों की बनावट के पीछे का विज्ञान, उसके प्रकार आदि के बारे में समझना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है।

आइए, सड़क की संरचना, इसके महत्वपूर्ण टेक्निकल पार्ट्स और सड़क पर बनी विभिन्न प्रकार की पट्टियों (Road Markings) को विस्तार से समझते हैं।


Road (सड़क) का क्रॉस-सेक्शन और इसके मुख्य घटक (Components of Road)




(Cross-section मतलब किसी चीज का काट दृश्य, जैसे किसी road का जब cross section बनाते हैं तो उसमें जमीन से लेकर ऊपर Pavement तक के materials और नाप की drawing के रूप में दर्शाते हैं। )

जब किसी सड़क का क्रॉस-सेक्शन (कट-व्यू) देखा जाता है, तो उसमें कई महत्वपूर्ण भाग होते हैं। प्रत्येक भाग का अपना विशिष्ट कार्य होता है:


Carriage Way (कैरिजवे)क्या है? 



सड़क का वह मध्य भाग जिस पर गाड़ियाँ चलती हैं।

विशेषता: यह भाग बिटुमिन (तारकोल) या कंक्रीट से पक्का बनाया जाता है। इसे Pavement Width भी कहते हैं।

चौड़ाई: 1-लेन सड़क के लिए सामान्यतः 3.75m और 2-लेन सड़क के लिए 7.0m से 7.5 चौड़ाई रखी जाती है।


Camber (कैंबर / सड़क का ढलान)

सड़क के कैरिजवे पर केंद्र (Center) से किनारों की तरफ दिया गया ट्रांसवर्स ढलान (Transverse Slope) 'कैंबर' कहलाता है।

उद्देश्य: बारिश के पानी को सड़क की सतह पर जमा होने से रोकना और उसे तुरंत किनारों (Drains) में भेजना। पानी जमा होने से पेवमेंट खराब हो जाता है।


मानक मान (IRC नियम के अनुसार):

भारी बारिश वाले क्षेत्र (Heavy Rainfall):

कंक्रीट सड़क: 2% जिसको 1 in 50 भी कहते हैं। 

(1 in 50 मतलब प्रति 50 centimeters, meters etc. पर 1 centimeters, meters की ऊँचाई या ढलान (गहराई) 

पतली बिटुमिन सड़क: 2.5% 1 in 40

डामर/कच्ची सड़क: 3% से 4%

कम बारिश वाले क्षेत्र (Light Rainfall):

कंक्रीट सड़क: 1.7% 1 in 60

पतली बिटुमिन सड़क: 2% 1 in 50


Shoulder (शोल्डर)

क्या है? कैरिजवे के ठीक बगल में दोनों तरफ बनी पक्की या अर्ध-पक्की (Paved or Semi-Paved) पट्टी 'शोल्डर' कहलाती है।

उद्देश्य:

आपातकालीन स्थिति (जैसे गाड़ी खराब होने पर) वाहनों को खड़ा करना।

मुख्य कैरिजवे को किनारों से मजबूती देना (Lateral Support)।

ओवरटेकिंग के समय अतिरिक्त जगह देना।

चौड़ाई: Indian Roads Congress (IRC) के अनुसार शोल्डर की न्यूनतम चौड़ाई 2.5m होनी चाहिए।


Berm (बर्म)

क्या है? शोल्डर के बाहर, सड़क की ढलान (Embankment slope) और ड्रेन (नाली) के बीच बची हुई मिट्टी की पट्टी को 'बर्म' कहते हैं।

उद्देश्य:

मिट्टी के कटाव (Erosion) को रोकना।

भविष्य में सड़क के चौड़ीकरण (Road Widening) के काम आना।

सड़क के किनारों को अतिरिक्त स्थिरता प्रदान करना।


मेडियन (Median)



दो विपरीत दिशाओं में जाने वाले Lanes (Traffic) को अलग करने के लिए सड़क के बीचों-बीच बनाई गई जगह या दीवार। इसके बीच में पेड़ भी लगाए जाते हैं जिससे रात में आमने-सामने के Headlights से बचा जाये। 

उद्देश्य: आमने-सामने की टक्कर (Head-on Collisions) को रोकना और रात में सामने से आने वाली गाड़ियों की हेडलाइट की चकाचौंध (Glaing) से बचाना।


Pavement (पेवमेंट) और इसके प्रकार:

सड़क की वह सतह जो वाहनों का भार सहती है, उसे Pavement कहते हैं। इंजीनियरिंग के आधार पर पेवमेंट मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:

Flexible Pavement (लचीला पेवमेंट - बिटुमिन/डामर की सड़क)



संरचना: इसमें नीचे से ऊपर तक निम्नलिखित लेयर्स (Layers) होती हैं:

Subgrade (सबग्रेड): पहले से बैठी या ट्रॉलियों से लाकर पाटी गई मिट्टी की सबसे निचली परत।

Sub-base Course (GSB): गिट्टी और मोरम की परत जो ड्रेनेज का काम करती है।

Base Course (WBM/WMM): मजबूत पत्थरों का बेस layer.

Surface Course (बिटुमिन की ऊपरी सतह): जिस पर गाड़ियाँ चलती हैं।

कार्यप्रणाली: यह भार को 'ग्रेन-टू-ग्रेन' (Grain to Grain Transfer) नीचे की परतों तक पहुँचाता है।

लाभ: शुरुआती लागत कम होती है, मरम्मत करना आसान होता है।


Rigid Pavement (कठोर पेवमेंट - कंक्रीट की सड़क)



संरचना: इसमें सीमेंट कंक्रीट (PQC - Pavement Quality Concrete) की स्लैब (Slab) का उपयोग किया जाता है।

कार्यप्रणाली: यह बीम (Beam Action / Flexural Strength) की तरह काम करता है और भार को बड़े क्षेत्रफल पर फैला देता है।

फायदे: इसकी उम्र बहुत अधिक (30-40 साल) होती है, इसमें गड्ढे (Potholes) नहीं बनते और रखरखाव का खर्च बहुत कम होता है।


Kerb

सड़क Pavement के किनारे के साथ साथ एक विशेष किनारी पत्थर/ कंक्रीट की लगायी जाती है जिसे Kerb कहते हैं। 

यह सड़क को extra strength देता है जो बाहर की तरफ Pavement को खिसकने से रोकता है। 

यह अक्सर आपको नगरीय सड़कों में देखने को मिलेंगे। 


Gaurd Rail

यह सड़क के किनारे किनारे, किसी पुल से सड़क गुज़रती है उसके किनारे किनारे लगाए जाते हैं जो 2 से 3 मीटर तक ऊंचे हो सकते हैं।

गहरी खाई या पुलों के किनारों पर गाड़ियों को नीचे गिरने से रोकने के लिए लगाई जाने वाली लोहे या कंक्रीट की रेलिंग।


Gradient (ग्रेडिएंट)

Camber सड़क की चौड़ाई (transverse direction) में दी जाने वाली ढलान है, जबकि Gradient सड़क की लंबाई (longitudinal direction) में दी जाने वाली ढलान है। यानी जब सड़क किसी ऊंचाई की तरफ ऊपर चढ़ती है या नीचे उतरती है, तो उसे Gradient कहते हैं।

इसे आमतौर पर रेशियो (जैसे 1 in 20) या प्रतिशत (जैसे 5%) में दर्शाया जाता है। इसका मतलब होता है कि हर 20 मीटर आगे बढ़ने पर सड़क 1 मीटर ऊपर उठ रही है।


Road Markings (सड़क पर बनी पट्टियाँ और उनके अर्थ)

सड़क पर बनी सफेद और पीली पट्टियाँ ट्रैफिक नियमों को दर्शाती हैं। इन्हें समझना बेहद जरूरी है:

Broken Line (टूटी हुई पट्टी) सफेद / पीली:



आप सुरक्षित स्थिति में लेन बदल सकते हैं और ओवरटेक कर सकते हैं।

Single Solid Line (एक ठोस पट्टी) सफेद / पीली:



आप ओवरटेक कर सकते हैं, लेकिन अपनी लेन में रहकर सावधान रहें। लेन बदलना सख्त मना है।

Double Solid Line (दोहरी ठोस पट्टी) पीली / सफेद:



ओवरटेकिंग और यू-टर्न (U-Turn) पूरी तरह से प्रतिबंधित (Strictly Prohibited) है। अपनी लेन में ही चलें।

Solid Line with Broken Line:



पीली

जिस तरफ टूटी हुई लाइन है, उस तरफ के वाहन ओवरटेक कर सकते हैं; ठोस लाइन की तरफ के वाहन ओवरटेक नहीं कर सकते।

Edge Line (किनारे की पट्टी):



सफेद

यह कैरिजवे और शोल्डर की सीमा तय करती है, जिससे रात में वाहन चालक को सड़क का किनारा स्पष्ट दिखे।

Stop Line:

सफेद

चौराहे या ट्रैफिक सिग्नल से ठीक पहले खींची गई मोटी चौड़ी पट्टी जहाँ वाहन को रोकना अनिवार्य होता है।

Zebra Crossing:



सफेद-काली

पैदल चलने वालों (Pedestrians) के लिए सड़क पार करने का स्थान।


भारत में सड़कों का वर्गीकरण (Classification of Roads in India)

नागपुर रोड प्लान (Nagpur Road Plan) के अनुसार भारतीय सड़कों को 5 श्रेणियों में बाँटा गया है:

Expressways (एक्सप्रेसवे): सबसे उच्च श्रेणी के हाईवे, जिन पर स्पीड लिमिट अधिक होती है और एंट्री/एग्जिट सीमित होती है (उदा. यमुना एक्सप्रेसवे)।

National Highways (NH - राष्ट्रीय राजमार्ग): देश के प्रमुख शहरों, बंदरगाहों और राज्यों की राजधानियों को जोड़ने वाली सड़कें। इनकी देखरेख NHAI करती है।

State Highways (SH - राज्य मार्ग): राज्य के भीतर जिला मुख्यालयों को राज्य की राजधानी से जोड़ने वाली सड़कें।

Major District Roads (MDR - मुख्य जिला सड़कें): जिले के प्रमुख बाजारों और तहसील मुख्यालयों को आपस में जोड़ती हैं।

Other District Roads & Village Roads (ODR / VR): ग्रामीण क्षेत्रों को आपस में और मुख्य सड़कों से जोड़ने वाली सड़कें (उदा. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना)।


मील पत्थर (Milestone):

पीले रंग की पट्टी के साथ- National Highway (NH)



हरे रंग की- State Highway (SH)



काले रंग की- Major District Road (MDR)


नारंगी रंग के- Village Road (VR)


Comments