पानी/ओस की बूंदे किसी सतह/पत्तों पर गोलाकार क्यों होती हैं?
आपने कभी अपने आस-पास ध्यान दिया है, जब ओस की बूँदें किसी चिकने सतह, घास, पेड़ के पत्तों आदि पर गिरती है तो उसका आकार गोल क्यूँ हो जाता है?
या पानी की छींटे जब किसी बर्तन, प्लास्टिक की सतह (जो सतह सोखने वाली ना हो) इत्यादि पर पड़ती हैं तो उस पानी का आकार (Shape) गोलाकार क्यूँ होता है?
यहाँ हम इसी के बारे में जानेंगे और इसके पीछे क्या वैज्ञानिक कारण है, इसको जानेंगे? असान भाषा में।
इसके पीछे का मुख्य कारण: पृष्ठ तनाव (Surface Tension) What is Surface Tension?
(पृष्ठ मतलब सतह, जैसे किसी plastic की सतह, और तनाव मतलब खिंचाव, तनन)
विज्ञान की भाषा में इस घटना का मुख्य कारण 'पृष्ठ तनाव' (Surface Tension) है।इसे समझने के लिए हमें पानी के अणुओं (Molecules) के व्यवहार को समझना होगा।
हर तरल पदार्थ (liquid) के अणुओं में एक-दूसरे को अपनी तरफ खींचने की एक प्राकृतिक प्रवृत्ति (स्वभाव) होती है। तरल अणुओं (Molecules) के बीच लगने वाले इस आपसी खिंचाव को ससंजक बल (Cohesive Force) कहते हैं।
(ससंजक मतलब एक साथ जुड़े हुए, सुसंगठित, किसी पदार्थ के Molecules को बाँधकर रखने वाला)
द्रव के भीतर के अणु (Bulk Molecules)
(अणु व परमाणु- परमाणुओं के जुड़ने से अणु बनता है है जैसे, (W + A + T + E + R) परमाणु = इनको जोड़ने पर WATER बनता है, जो कि अणु Molecules हैं, वैसे ही H2O अणु है जिसमें H hydrogen के 2 परमाणु और Oxygen का 1, जैसे कोई दीवार की ईंटें परमाणु और पूरी दीवार अणु)
द्रव (पानी) के अंदर गहराई में स्थित किसी अणु पर हर तरफ से समान ससंजक बल (Cohesive force) लगता है।
चारों ओर बराबर खिंचाव से इस पर कुल लगने वाला बल शून्य (Zero) होता है।
अब द्रव के ऊपर के अणु ( Surface Molecules)
जो अणु सबसे ऊपर होते हैं उनके ऊपर द्रव के अणु नहीं होते और ऊपर केवल हवा होती है जिससे आकर्षक बल नगण्य होता है।
जिसके परिणामस्वरूप सतह के अणुओं पर (जो ऊपर हैं) नीचे की ओर एक खिंचाव बल काम करता है। इसी खिंचाव के कारण सतह के अणु हमेशा अंदर की ओर खिंचे रहते हैं।
ऊपर सतह का द्रव तनी हुई झिल्ली की तरह व्यावहार करने लगता है इसी को पृष्ठ तनाव कहते हैं।
तो फिर आकार 'गोल' ही क्यों? (Why the shape 'round'?)
अब सवाल उठता है कि सिकुड़ने पर पानी चौकोर या तिकोना क्यों नहीं होता, वह गोल ही क्यों होता है?
इसका उत्तर ज्यामिति (Geometry) के एक सरल नियम में छुपा है। पृष्ठ तनाव (Surface Tension) के कारण कोई भी तरल पदार्थ (Liquid) अपनी सतह के क्षेत्रफल (Surface Area) को कम से कम (minimize) करने की कोशिश करता है।
ज्यामिति के अनुसार, किसी निश्चित आयतन (Volume) के लिए, गोलाकार (Sphere) का पृष्ठीय क्षेत्रफल सबसे कम होता है।
यही कारण है कि जब पानी की बूँदें किसी ऐसी सतह पर गिरती हैं जो उन्हें सोखती नहीं है (जैसे कमल का पत्ता या प्लास्टिक), तो पानी के अणु पृष्ठ तनाव के कारण आपस में मजबूती से चिपक जाते हैं और सबसे कम क्षेत्रफल वाली आकृति 'गोलाकार' का रूप ले लेते हैं।
दैनिक जीवन में पृष्ठ तनाव के कुछ और रोचक उदाहरण:
पानी पर कीड़ों का चलना: आपने तालाब या नहर, नदी के पानी पर कुछ हल्के कीड़ों को दौड़ते हुए देखा होगा।
वे डूबते नहीं हैं क्योंकि पृष्ठ तनाव के कारण पानी की सतह एक झिल्ली का काम करती है जो उनके हल्के वजन को सह लेती है।
गिलास में पानी का ऊपर तक भरना: अगर आप किसी गिलास को एकदम ऊपर तक पानी से भर देंगे, तो पानी तुरंत गिरने के बजाय गिलास के किनारे से थोड़ा ऊपर उठकर एक हल्का सा उभार (Dome) बना लेता है। यह भी पानी के अणुओं के आपस में बंधे रहने के कारण होता है।
पेंट ब्रश को पानी से निकालना: जब पेंट ब्रश पानी के अंदर होता है, तो उसके बाल फैले रहते हैं, लेकिन जैसे ही आप उसे पानी से बाहर निकालते हैं, पृष्ठ तनाव के कारण पानी सिकुड़ता है और ब्रश के सारे बाल आपस में चिपक जाते हैं।
पृष्ट तनाव का तापमान से सम्बंध (Relation of surface tension to temperature):
जब द्रव का ताप बढ़ाते जाये तो उनके अणुओं की गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) बढ़ जाती है और अणु तेजी से गति करने लगते हैं जिससे उनके बीच का ससंजक बल (Cohesive Force) कमजोर हो जाता है।
जब Cohesive Force कमजोर होगा तो अणुओं के बीच खिंचाव भी कम होगा। इसको एक उदाहरण से समझते हैं।
ठंडे सूप के बजाय गर्म सूप ज्यादा स्वादिष्ट होना: सूप गर्म होने के कारण उसका पृष्ठ तनाव भी कम होता है और सूप पूरे मुँह, जीभ पर अच्छे से फैल जाता है।
पृष्ठ तनाव का अशुद्धियों से प्रभाव (Effect of surface tension on impurities):
आपने देखा होगा कि पानी की सतह पर कोई मच्छर या कीट (insects), सूई असानी से तैर लेते हैं। लेकिन अगर हम पानी में थोड़ा सा साबुन/डिटर्जेंट मिला दें तो मच्छर, कीट, सुई असानी से डूब जायेंगे। साबुन/डिटर्जेंट पानी के पृष्ट तनाव को कम कर देते हैं।
निष्कर्ष:
प्रकृति में हो रही हर छोटी-बड़ी घटना के पीछे विज्ञान का कोई न कोई नियम अवश्य काम कर रहा होता है।

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