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Viram Chihn Kya Hai, विराम चिह्न का प्रयोग कैसे करें, विराम चिह्न कितने प्रकार के होते हैं? Types of punctuation marks?

हम हर रोज इन्टरनेट, Social Media, अखबारों, किताबों में तरह-तरह के लेख, Captions, खबरें, कहानियां इत्यादि पढ़ते रहते हैं। बहुत से लोग पढ़ते या लिखते समय, शब्दों में इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के चिन्हों (विराम चिन्हों) पर खास ध्यान देते हैं; और उन विराम चिन्हों के अनुरूप ही वाक्यों को पढ़ते हैं, तो बहुत लोग इसपर ज्यादा ध्यान नहीं देते और अपने सुविधानुसार ही लिखते‐पढ़ते हैं।

क्या आपको पता है? वाक्यों, शब्दों में प्रयोग होने वाले चिन्ह (Symbols), विराम चिन्ह क्या हैं? विराम चिन्ह क्यों होते हैं? शब्दों, वाक्यों के साथ लगने वाले चिन्ह क्या कहलाते हैं? इनका मुख्य कार्य क्या होता है? और क्यों प्रयोग किए जाते हैं? आइए साथ में इस लेख के साथ पढ़ते और समझते हैं। मैं भी अभी सीख ही रहा हूँ। यहाँ भी अगर कोइ गलती हो, तो क्षमा करें। गलतियाँ सभी से हो सकती हैं; और धीरे-धीरे अध्ययन से ही इसे सुधारा जा सकता है।

1. विराम चिह्न क्या है

विराम का का मतलब ही होता है रुकना, ठहरना (ठहराव)। कोई भी वाक्य पढ़ते समय, अगर हम बिना रुके ही पढ़ते जाएं तो क्या होगा? समझ ही नहीं आएगा, कि वास्तव में हमने पढ़ा क्या है और समझा क्या है। हो सकता है अगर आप किसी को कुछ कहते हैं और बिना विराम चिन्हों के कहते हैं, तो हो सकता है सामने वाला कहने का ऊल्टा ही समझ ले, और अर्थ का अनर्थ हो जाए।
वाक्यों को पढ़ने-लिखने और बोलने में, खासकर समझने में स्पष्टता हो, इसलिए वाक्यों को विराम चिन्हों द्वारा कई खण्डों में विभाजित किया जाता है। जब वाक्यों में विराम चिन्ह लग जाता है, तो उसी के अनुसार वाक्यों को विराम के साथ पढ़ना-पढ़ाना चाहिए, जिससे वाक्यों का सही अर्थ में उच्चारण हो।

अतः हम विराम चिह्न को इस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं, "पढ़ते या बोलते समय वाक्यों के बीच में कुछ समय के लिए रुकने, भावों को व्यक्त करने के लिए जो चिह्न प्रयोग करते हैं, उसे विराम चिह्न कहते हैं।"

यहाँ ही देख लीजिए
जब कोई किसी से कहता है, “कहाँ भागे जा रहे हो रुको मत जाओ”, ये बिना विराम चिन्ह का एक वाक्य है। अगर इसे बिना विराम चिन्ह के पढ़ा जाये, तो भागने वाला समझेगा "रुकना नही है, जाना है।" अगर इसमें विराम चिन्ह लगा दिया जाये, जैसे‐ "कहाँ भागे जा रहे हो? रुको, मत जाओ" तो इसका अर्थ बदल जाएगा। जाने के बजाए "रुकना" इस वाक्य का भाव हो जाएगा।

इस वाक्य के दो मतलब निकलते हैं, एक तो रुकने के अर्थ में, एक जाने के। अगर कोई इस वाक्य को जोर से बोलता है, या थोड़ा उदास मन या हंसते हुए तो, "रुको" के बाद विस्मय का चिन्ह लगता है या "रुको मत" के बाद; जैसे— "कहाँ भागे जा रहे हो रुको! मत जाओ" या "कहाँ भागे जा रहे हो? रुको मत! जाओ।" यहाँ "कहाँ भागे जा रहे हो" के बाद (?) प्रश्न वाचक चिन्ह लगा हैं, क्योंकि ये प्रश्न के सन्दर्भ में वाक्य है।

आइए एक-एक करके, हिन्दी में प्रयोग होने वाले विराम चिह्नों को समझते हैं। विराम चिह्न निम्न प्रकार के होते हैं — पूर्ण विराम (।), अल्प विराम (,), अर्धविराम (;), प्रश्नवाचक चिह्न (?), विस्मयादिबोधक चिह्न (!) इत्यादि।

2. पूर्ण विराम (Full Stop) - ।

पूर्ण विराम वाक्य समाप्त होने पर लगाते हैं। इसकी जगह थोड़ी देर रुकते हैं। इस चिह्न को दर्शाने के लिए खड़ी पाई का (।) इस्तमाल करते है।

उदाहरणः

  • रोज सुबह जल्दी उठना चाहिए।
  • हमें सदा सत्य बोलना चाहिए।

ऊपर के दोनों वाक्य अपने-आप में पूर्ण हैं, इसलिए खड़ी पाई (।) लगने के बाद, ये एक-दूसरे से पृथक होते हैं।

3. अल्प विराम - , (Comma)

वाक्यों में अल्प विराम का इस्तेमाल सबसे अधिक होता है। कहीं अगर पूर्ण विराम की आवश्यकता है, लोग अल्प विराम का उपयोग करते हैं। अल्प विराम का अर्थ थोड़ी देर रुकना होता है, लेकिन पूर्ण विराम से कम यानि एक तिहाई समय। इसका उपयोग कई वाक्यों को पृथक करने के लिए होता हैं। एक वाक्य में अगर कोई दूसरा वाक्य या कई अलग-अलग शब्द घुस आए तो उसे अलग करने के लिए comma यानी अल्प विराम को प्रयोग होता है। किसी वक्ता के कथनों को कहने के लिए इसका उपयोग होता है.

उदाहरण:

  • उसने कहा, मैंने सुना।
  • उसने कहा, "मैं साईकिल चलाने जा रहा हूँ।"
  • धीरे-धीरे चलो, नहीं तो गिर जाओगे।

ऊपर के उदाहरण में, "उसने कहा" कोई और कह रहा है। "मैने सुना" में कोई और सुन रहा है। वाक्य में दो वाक्य एक साथ हैं जिन्हें समझने लिए अल्प विराम का प्रयोग हुआ है।

4. अर्धविराम - ;

अर्धविराम का प्रयोग, पूर्ण विराम से आधे और अल्प विराम से अधिक समय रुकने के लिए किया जाता है। पूर्ण विराम के लिए जितना समय रुकते हैं, उसके आधे समय (1/2), अर्धविराम में रुकते हैं। इस विराम चिह्न का उपयोग ना के बराबर देखने को मिलता है, इसकी जगह लोग अल्प विराम का ही उपयोग करते हैं जो कि गलत आदत है।

इसका उपयोग किसी विषय के वाक्य के ही कई उपवाक्य को अलग करने के लिए किया जाता है। ऊपर हमनें अल्प विराम को देखा, जिसमें एक से अधिक वाक्यो को अलग करने की बात की गई है, लेकिन अर्ध विराम में एक वाक्य (या कर्ता कह लें) के ही कई वाक्य (कर्ता की बातें, क्रिया) को अलग करने के लिए इस चिह्ल का उपयोग होता है।

उदाहरण:

  • मैंने कल पढ़ा; अच्छे से समझा; एक नोटबुक पर लिखा।
  • सूर्य उदय हूआ; सवेरा हुआ; दोपहर हूई; रात हुई।

ऊपर के उदाहरणों में एक ही विषय का वाक्य, क्रियाएं हैं जिन्हें उप वाक्यों में अर्ध विराम लगाकर बाँटा गया है।

5. अपूर्ण विराम (Colon) — :

अपूर्ण विराम जिसे उप विराम भी कहते हैं। ये अक्सर शीर्षकों (Titles, Headings) में प्रयोग होता है। इसका प्रयोग किसी सूची को दर्शाने के लिए भी करते हैं।

  • शीर्षक के लिए: पुस्तकों के तरह-तरह के लेखों में विषय औरउसके उप विषय को दर्शाने के लिए उप विराम का प्रयोग करते हैं; जैसे — विज्ञान : प्रयोग एवं परीक्षण / प्रदूषण: समस्या और निदान
  • पैराग्राफ के मुख्य वाक्य: पूरे एक पैराग्राफ का एक मुख्य शीर्षक, हेडिंग के बाद उप विराम (:) का प्रयोग करते हैं, लगाते हैं जिसे एक हेडिंग के रूप में दिखाते हैं;
    जैसे — मुख्य वाक्य: [यहाँ इसका एक पैराग्राफ होगा जो "मुख्य वाक्य" शीर्षक की व्याख्या करेगा]
  • समय और अनुपात इत्यादि में: उप विराम को हम समय (Time) लिखते समय, अनुपात दिखाने के लिए उपयोग करते हैं;
    जैसे — 12:30 (12 बजकर 30 मिनट) / 1:2 (1 अनुपात 2) इत्यादि।

6. प्रश्नवाचक चिह्न (Question Mark) — (?)

इसे तो सभी जानते हैं। प्रश्न वाचक चिह्न को प्रश्न वाले वाक्यों में प्रयोग करते हैं। अगर एक ही वाक्य में एक से अधिक प्रश्न हों तो प्रश्न चिह्न बीच-बीच में ना लगकर अंत में ही लगता है;

जैसे — तुम्हारा नाम क्या है, अपना नाम बताओ और कहाँ रहते हो?

इस वाक्य में तीन प्रश्न हैं और तीनों को एक साथ पूछा जा रहा है इसलिए बीच के दो प्रश्नों में अल्प विराम का उपयोग करके, तीसरे प्रश्न यानी आखिर प्रश्न में प्रश्नवाचक चिह्न का प्रयोग हुआ है।

7. विस्मयादिबोधक चिह्न (Exclamation Mark) — !

इस चिह्न का प्रयोग; कोई भाव (आश्चर्य, सुख और दुख, डर, हास्य इत्यादि) प्रकट करने के लिए किया जाता है;

  • वाह! कितना मनोहर दृश्य है!
  • ओह!
  • अरे!
  • हाय! सुनकर दुख हुआ!

8. योजक, निर्देशक चिह्न (Dash) — (–, —)

निर्देशक चिह्न (—): यह योजक चिह्न से थोड़ा बड़ा होता है। इसका प्रयोग किसी उदाहरण, विवरण को दर्शाने; नाटक लेखन में किरदारों के संवाद के लिए नाम के दायीं और प्रयोग किया जाता है, जिसके बाद संवाद लिखा जाता है।
जैसे — हमारे यहाँ तीन प्रकार के मौसम होते हैं— ठण्डी, गर्मी, बरसात।
किसी नाटक में, श्याम — मुझे अभी कहीं जाना है。

इस चिह्न का प्रयोग किसी उद्धरण के लेखक को दर्शाने के लिए करते हैं; जैसे — "जीवन एक साइकिल की तरह है, संतुलन बना रहेगा तो सही चलेगा।" — अल्बर्ट आइंस्टाइन

योजक चिह्न (–): डैश, यानी निर्देशक चिह्न से थोड़ा छोटा होता है। योजक का अर्थ ही जोड़ना होता है। जब दो शब्द एक दूसरे के जोड़ना हो, तो योजक चिह्न का प्रयोग करते हैं; जैसे — सुख–दख, नया–पुराना, पढ़ना–लिखना, अच्छा–बुरा इत्यादि。

9. उद्धरण चिह्न (" ", ' ')

  • एकल उद्धरण चिह्न (Single Quote) ' ': इसका प्रयोग किसी वाक्य से किसी शब्द, क्रिया, विशेषण, अक्षर इत्यादि को अलग करने के लिए किया जाता है;
    जैसे — मुन्शी प्रेमचंद का 'कर्मभूमि' एक प्रसिद्ध उपन्यास है। / 'क' हिन्दी वर्णमाला का एक अक्षर है।
  • दोहरा उद्धरण चिह्न (Double Quote) " ": उद्धरण चिह्न जिसे अवतरण चिह्न भी कहा जाता है। इसका प्रयोग किसी के कहे हुए कथन को दर्शाने में, किसी परिभाषा को लिखने में, के लिए करते हैं।
    जैसे — उसने कहा, "मैं बाजार जा रहा हूँ।"

10. अन्य महत्वपूर्ण चिह्न, प्रयोग और उनके नाम

  • लाघव चिह्न (Point) ॰,. : इसका प्रयोग शब्दों को संक्षिप्त करने के लिए किया जाता है; जैसे — नियमावली को संक्षिप्त में नि॰ अथवा नि. लिख सकते हैं। संयुक्त को सं. या संo भी लिख सकते हैं।
  • विकल्प चिह्न (Option Mark) /: जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है; विकल्प, यानी दो या दो से अधिक में से कोई एक मान कर पढ़ना है; जैसे — श्री/श्रीमती, हाँ/नहीं, इत्यादि।

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