जब हम किसी कैमरा या स्मार्टफोन से फोटो खींचते हैं तो खिंची हुई Photo image कैसे कैमरे में कैद हो जाती हैं? कैमरे में लगी चिप में इमेज कैसे पहुँचती हैं? और उसमें किस फॉरमैट में फोटो सेव होती है? कैमरे के रॉ मटिरिअल (Raw Material of Camera) किन-किन फाइल टाइप्स (File Types) में सुरक्षित होती हैं? फोटो खींचते समय दो क्रियाएँ होती हैं, एक फोटो कैप्चर होना और दूसरा फोटो सेव होना। आइए समझते हैं।
📌 विषय सूची (Table of Contents)
- 1. फोटो कैप्चर और सेव होने की प्रक्रिया (Photo Capture & Save)
- 2. 0s और 1s क्या है? (What is 0s and 1s?)
- 3. Pixel क्या है? Pixel और 0s 1s में अंतर
- 4. 8K vs 4K Resolution, Pixels, Dimensions & Storage
- 5. Camera किस फॉर्मेट में फाइल्स को सेव करता है? (RAW Formats)
- 6. रॉ (RAW) फाइल को किन-किन फाइल टाइप में बदला जाता है?
- 7. क्या हर कैमरा रॉ फाइल ही सेव करता है?
- 8. FITS File Format क्या है?
- 9. अलग-अलग फाइल टाइप्स (Raster vs Vector Formats)
- 10. Lossy और Lossless Compression क्या है?
- 11. हर फाइल के अंत में Extension क्यों होता है?
1. फोटो कैप्चर और सेव होने की प्रक्रिया
Photo Capture होना
कैमरा से फोटो खींचते समय सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रोशनी (Light) की होती है।
- लाइट: जब हम कैमरा का Shutter Button या Capture Button दबाते हैं, इसके बाद जिस दृश्य (Scene) का Photo click हुआ है उस दृश्य से Light टकराकर कैमरा के लेंस से होकर अंदर जाती है। इस आई हुई Light को लेंस एक जगह इकट्ठा (Focus) करता है।
- सेंसर: लेंस के ठीक पीछे एक Image Sensor (CMOS या CCD चिप) लगा होता है जिसमें लाखों की संख्या में छोटे-छोटे लाइट डिटेक्टर लगे होते हैं जिन्हें Pixels कहते हैं। ये Sensor एक तरह का डिजिटल पर्दा होता है।
- लाइट से विद्युत संकेत (Electric Signal): जब लाइट उन छोटे-छोटे डिटेक्टर यानी Pixels पर पड़ती है तो Pixels, Light की तीव्रता और रंग को Electric Signal (विद्युत संकेत) में बदल देते हैं। कम लाइट पड़ती है तो कम इलेक्ट्रिक सिग्नल, ज्यादा लाइट ज्यादा इलेक्ट्रिक सिग्नल।
Photo Save होना
Electric Signal बनने के बाद Photo को Digital File में बदला जाता है और स्टोर किया जाता है।
- Image Processor: Image processor यानी camera का दिमाग। Electric Signal सीधे Image processor के पास जाता है। ये processor उन signals को डिकोड करता है और Color, Brightness आदि को व्यवस्थित (Adjust) करता है।
- File Format: Processor उस फोटो को डिजिटल कोड 0s और 1s में बदलकर एक File Format में पैक करता है। जैसे, JPEG (compressed photo) या RAW (uncompressed, high quality image)।
- Storage में Save होना: File तैयार होने के बाद ये कैमरा की memory में save हो जाती है।
- DSLR Camera: Photo SD Card की flash memory में
- Smartphone Camera: Photo Phone की Internal Flash Memory में
Flash Memory में ये photos 0s और 1s के रूप में Electron charge के द्वारा save रहती हैं जिससे कैमरा बंद होने पर भी फोटो डिलीट नहीं होता है।
2. 0s और 1s क्या है? (What is 0s and 1s?)
0s और 1s “Binary Code” है जिसे हिंदी में द्विधारी अंक भी कह सकते हैं। ये डिजिटल उपकरणों, कंप्यूटर, स्मार्टफोन, कैमरा आदि की मूल भाषा है। दुनिया का कोई भी डिजिटल उपकरण चाहे फोटो हो, वीडियो, टेक्स्ट हो या संगीत, सब कुछ अंदर से 0s और 1s का एक बड़ा combination होता है।
डिजिटल उपकरण सिर्फ 0s और 1s ही क्यों समझते हैं?
Computers, smartphone, Camera आदि के पास इंसानी मस्तिष्क (Human Brain) तो होता नहीं है, वो सिर्फ Electricity यानी बिजली पर ही चलते हैं। बिजली के पास दो ही विकल्प होते हैं:
- Switch off: Current नहीं है यानी 0
- Switch on: Current है यानी 1
आपके फोन, कैमरा के processor के भीतर अरबों सूक्ष्म (Microscopic) switches होते हैं जिन्हें Transistor कहते हैं। इन्हीं Switches On/Off से पूरी डिजिटल दुनिया चलती है।
0s और 1s से इमेजेस कैसे बनती हैं?
0s और 1s में से 0 या 1 को Bit कहते हैं। जब इन्हें एक साथ मिलाया जाता है तो अलग-अलग जानकारी (Information) बनती है।
- 1 bit: 0 या 1 दो बातें बता सकता है, On या Off, क्योंकि 0 और 1 दोनों bit कहलाते हैं।
- 8 bits (1 byte): 8 bits मिलकर 256 अलग-अलग combination बना सकते हैं जैसे 00000000 से लेकर 11111111 तक।
फोटो में इसका उपयोग:
फोटो छोटे-छोटे Pixels से मिलकर बनता है और हर pixel का अपना एक अलग रंग और brightness होती है।
00000000(सभी 0): Pixel बिल्कुल काला (Black) है।11111111(सभी 1): Pixel बिल्कुल सफेद (White) है।10101010(मिलावट): इनके बीच का कोई शेड जैसे Gray, Light Red, Dark Blue etc.
जब कैमरा फोटो खींचता है तो वो लाखों Pixels के colors को इन्हीं 0s और 1s के लंबे कोड में बदल देता है।
Memory (चिप) में 0s और 1s कैसे स्टोर होते हैं?
जब image save होती है तो SD Card या Phone Memory में ये physically ऐसे रहते हैं—
- Flash Memory: Memory chip के अंदर millions छोटे-छोटे Electronic Traps होते हैं।
- Trap में Electron का रहना = 0
- Trap का खाली होना = 1
Device power off होने के बाद भी ये Electrons ऐसे ही फंसे रहते हैं और Power Off के बाद भी डिलीट नहीं होते।
3. Pixel क्या है? Pixel और 0s 1s में अंतर
पिक्सेल और 0s 1s दोनों अलग-अलग चीजें हैं लेकिन आपस में जुड़ी हुई हैं। दोनों में अंतर एक उदाहरण से समझते हैं-
- Pixel (dot): मान लीजिए Pixel, स्क्रीन पर दिखने वाला एक छोटा सा डॉट या लाइट बल्ब है जो रंग पैदा करता है।
- 0s and 1s: ये वो बाइनरी कोड (आदेश) है जो उस बल्ब को बताता है कि उसे कौन सा रंग दिखाना है।
Pixel में कितने 0s 1s होते हैं?
एक पिक्सेल को चलाने के लिए सिर्फ एक 0 या 1 काफी नहीं होता है।
- पिक्सेल की बनावट: स्क्रीन पर प्रत्येक पिक्सेल के अलावा उनके अंदर तीन और Sub-pixels होते हैं, RGB यानी Red, Green, Blue (लाल, हरा, नीला)।
- 24 bit code: आज-कल की फोटोज में एक सिंगल पिक्सल का रंग तय करने के लिए लगभग 24 (जीरो और एक) का एक लंबा कोड उपयोग होता है।
11111111 11111111 11111111 : तीनों रंग ऑन (पूरा सफेद)
00000000 00000000 00000000 : तीनों रंग ऑफ (काला रंग)
सीधे शब्दों में कहें तो पिक्सेल वो है जो स्क्रीन पर दिखता है और 0s 1s वो अदृश्य कोड है जो मेमोरी में छिप कर उस पिक्सेल को चलाते हैं।
4. 8K vs 4K Resolution, Pixels, Dimensions, Zooming etc.
4K, 8K आदि Photo, video, Screen की Resolution मापने के तरीके हैं। 4K, 8K में K का मतलब Kilo होता है, K = 1,000। इसका मतलब Screen पर बाएँ से दायें कितने Pixels की लाइन बनी हुई है।
- 4K = Horizontal Direction में 4,000 pixels (Exact 3840 pixels).
- 8K = Horizontal Direction में 8,000 pixels (Exact 7680 pixels).
Resolution और Pixel का अंतर
| Resolution Name | Dimension Pixel | Total Pixels | MegaPixel Count |
|---|---|---|---|
| Full HD 1080p | 1920 x 1080 | 20 lakh pixels | 2 MP |
| 4K Ultra HD | 3840 x 2160 | 83 lakh pixels | 8.3 MP |
बड़ी स्क्रीन्स के लिए 4K, 8K उपयोग होता है।
Storage and Processing: जितना ज्यादा पिक्सल होगा, 0s और 1s का डेटा उतना ही बड़ा होगा।
5. Camera किस फॉर्मेट में फाइल्स को सेव करता है? (RAW Formats)
एक कैमरे में कच्चा डेटा के रूप में फाइल को सेव करता है जिसे रॉ (RAW) material कहते हैं।
हर कैमरा कंपनी के सेंसर और कोडिंग अलग-अलग होती है। इसलिए उन्होंने अपने अलग रॉ फाइल टाइप Extension बनाए हैं। जैसे:
- Canon का फाइल टाइप:
.CR2या.CR3(Canon Raw version 2 or 3) - Nikon का फाइल टाइप:
.NEF/.NRW(Nikon Electronic Format) - Sony का फाइल टाइप:
.ARW/.SR2(Sony Alpha Raw) - Fujifilm का फाइल टाइप:
.RAF(Fuji Raw Image File) - Panasonic का फाइल टाइप:
.RW2(Panasonic Raw Image) - Universal / Adobe का फाइल टाइप:
.DNG(Digital Negative) - Cinema Cameras का फाइल टाइप:
.R3D/.ARI(RED digital cinema / ARRI RAW hollywood movie cinemas) - Astronomy का फाइल टाइप:
.FITS(Flexible Image Transport System)
6. रॉ (RAW) फाइल को किन-किन फाइल टाइप में बदला जाता है?
रॉ फाइल को अलग-अलग श्रेणी में विभिन्न फाइल टाइप्स में बदला जाता है जैसे-
🌐 Standard Image Format (Web)
.jpg, .jpeg, .png, .webp, .heic / .heif
🎨 Professional & High Quality Editing
.tif / .tiff, .dng, .psd / .psb
🎬 High Dynamic Range (HDR) & Cinema (VFX)
.exr, .hdr
🔬 Scientific and Medical Formats
.fits, DICOM (.dcm)
7. क्या हर कैमरा रॉ फाइल ही सेव करता है?
नहीं! रॉ फॉर्मेट का मतलब होता है 100% कच्चा डेटा। प्रत्येक कैमरा की अपनी एक क्षमता होती है जिसके हिसाब से सभी अलग-अलग डेटा सेव करते हैं।
अलग-अलग कैमरा और उनके सेव करने का तरीका:
- बेसिक फोन और कैमरा: सिर्फ
.jpegया.heicमें। फोटो खींचते समय लाइट डेटा को खुद ही प्रोसेस कर लेता है और फालतू डेटा को कंप्रेस कर हटा देता है और कम साइज की jpeg फाइल बना देता है जिससे फोन/कैमरा की स्टोरेज जल्दी भरे न। - प्रोफेशनल कैमरा: RAW या JPEG या दोनों एक साथ। रॉ फाइल में पूरा कच्चा डेटा होता है जो प्रोफेशनल फोटोग्राफर के लिए एक बेहतर फोटो बनाने के लिए आवश्यक होता है। रॉ फाइल में एडिटिंग करने से फोटो खराब नहीं होती है।
- सीसीटीवी, डैशकैम, एक्शन कैमरा: H.264, H.265, MP4 या JPEG। इन कैमरों से continuous recording होती रहती है। अगर ये भी रॉ फाइल इकट्ठा करने लगेगा तो इसकी स्टोरेज कुछ ही वक्त में भर जाएगी।
- Astronomical camera: ये 100% रॉ डेटा इकट्ठा करते हैं और फाइल फॉर्मेट अलग होता है, जैसे
.FITS,.SER।- स्पेस से आने वाली लाइट बहुत धुंधली होती है।
- Astrophotography camera के सेंसर को -10°C से -20°C तक ठंडा रखा जाता है ताकि सेंसर का अपना Heat Noise न आए।
- सेंसर का 14bit या 16bit का एक-एक पिक्सेल का Exact Value FITS File में सेव होता है। बाद में इस रॉ डेटा को Specialized Astro-Software से हजारों फोटो को आपस में जोड़कर साफ किया जाता है।
• रॉ (RAW) फाइल: कच्ची सब्जियों, राशन (Ingredients) हैं जिसका उपयोग करके आप कोई भी डिश बना सकते हैं।
• JPEG File: वो बनी बनाई सब्जी-रोटी है जिसे आप खा सकते हैं, अपने दोस्तों, परिवार के साथ शेयर कर सकते हैं।
• FITS (Astronomical Raw): Scientific Lab का पूरा केमिकल एलिमेंट है जिसमें थोड़ा सा भी मिलावट अलाउ नहीं होता है।
8. FITS File Format क्या है?
FITS File format को 1970 में NASA & IAU (International Astronomical Union) ने मिलकर डिजाइन किया ताकि स्पेस और एस्ट्रोनॉमी के साइंटिफिक डेटा को बिना किसी अल्टरेशन (Alteration) के सेव किया जा सके।
9. अलग-अलग फाइल टाइप्स (Image File Type)
Digital image file को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है-
- Raster Formats (ये पिक्सल्स से बनते हैं)
- Vector Formats (ये मैथमेटिकल कोड और लाइन से बनते हैं)
Raster Formats Images
जो हम रोज इंटरनेट पर इस्तेमाल करते हैं उन्हें Raster Images कहते हैं। ये निम्न प्रकार के होते हैं-
- JPEG/JPG (Joint Photographic Experts Group):
- ये Lossy compression का इस्तेमाल करता है। फाइल साइज छोटा करने के लिए ये ऐसे विवरणों को हटा देता है जिसे इंसानी आंख आसानी से नहीं पकड़ पाती हैं।
- फाइल साइज छोटा होता है और हर डिवाइस पर खुलता है।
- इसे डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया, वेब पर इस्तेमाल करते हैं।
- इसकी सबसे बड़ी कमी कि इसको बार-बार एडिट करते जाएं तो इसकी क्वालिटी खराब होती जाती है।
- PNG (Portable Network Graphics):
- ये Lossless compression का इस्तेमाल करता है जिससे फाइल साइज कम होने पर भी फोटो की क्वालिटी खराब नहीं होती है।
- ये Transparent Background को सपोर्ट करता है, जो इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
- इसका उपयोग Logos, Text Graphics, Icons, Transparent Background Images में किया जाता है।
- इसकी फाइल साइज जेपीजी की तुलना में काफी बड़ी होती है।
- WEBP (Web Picture Format):
- ये गूगल का बनाया एक मॉडर्न फॉर्मेट है जो JPEG & PNG दोनों की खूबियां एक साथ देता है।
- ये Lossy & Lossless दोनों compression सपोर्ट करता है और Transparent Background भी देता है।
- इसको वेबसाइटों के ब्लॉग पर फोटो के रूप में प्रयोग किया जाता है जिससे पेज जल्दी-जल्दी लोड होता है।
- उसी क्वालिटी पर ये JPEG से लगभग 25-30% छोटा साइज देता है।
- HEIC/HEIF (High Efficiency Image Format):
- ये एप्पल स्मार्टफोन का डिफॉल्ट कैमरा फॉर्मेट होता है।
- ये मॉडर्न वीडियो कंप्रेशन टेक्नोलॉजी पर काम करता है।
- इसका इस्तेमाल मोबाइल फोटोग्राफी में स्पेस बचाने के लिए करते हैं।
- ये JPEG से आधी स्टोरेज खर्च करके बेहतर डायनामिक और कलर प्रदान करता है।
- GIF (Graphics Interchange Format):
- ये बहुत सारी इमेजेस को एक के पीछे एक रख के एक वीडियो जैसा लूप बनाता है।
- ये सिर्फ 256 कलर सपोर्ट करता है।
- इसका उपयोग एनीमेशन, रिएक्शन इमोजी, स्टिकर्स आदि में करते हैं।
- इसकी कलर की गहराई कम होने के कारण एक बेहतर फोटो के लिए बेकार साबित होता है।
Professional & Editing Format
- TIFF (Tagged Image File Format): ये बिना किसी कंप्रेशन के हाई क्वालिटी फोटो स्टोर करता है। ये 8 बिट और 16 बिट कलर डेप्थ सपोर्ट करता है। 0 क्वालिटी खपत होती है। ये प्रोफेशनल प्रिंटिंग, मैगजीन, पोस्टर आदि में उपयोग होता है। इसकी फाइल साइज 50 से 200 MB तक हो सकती है।
- PSD (Photoshop Document): ये Adobe Photoshop की वर्किंग प्रोजेक्ट फाइल होती है। इसमें आपके बनाए गए लेयर्स, टेक्स्ट आदि सब अलग-अलग जगह सेव होते हैं। इसका उपयोग ग्राफिक डिजाइनिंग और Advanced Photo Editing के लिए करते हैं। इसे सिर्फ फोटोशॉप या संबंधित सॉफ्टवेयर ही खोल सकता है।
- DNG (Digital Negative): ये Adobe का बनाया Universal Raw Format है। इसका उपयोग रॉ फाइल को अलग-अलग डिवाइस, सॉफ्टवेयर में Future Proof के लिए सेव करने के लिए किया जाता है।
Vector Format
- SVG (Scalable Vector Graphics): ये pixels से नहीं बनता, इसमें mathematical formulas जैसे, curve, line, points का कोड होता है। इस इमेज को आप कितना भी Zoom कर लो ये कभी भी फटती नहीं है। इसका उपयोग वेबसाइट के आइकन, मोबाइल के ऐप आइकन, वेक्टर इलस्ट्रेशन आदि में किया जाता है।
10. Lossy और Lossless Compression क्या है? What is Lossy and Lossless?
Lossy Compression
इस प्रक्रिया में फाइल को छोटा करने के लिए डेटा के कुछ हिस्सों को स्थायी रूप से हटा दिया जाता है। Compression के बाद फाइल को पहले जैसा नहीं किया जा सकता, मतलब मूल रूप में नहीं लाया जा सकता है।
हमारी आंखें बहुत सूक्ष्म रंगों के अंतर को नहीं पहचान पातीं, कान सूक्ष्म ध्वनियों को नहीं सुन पाते इसलिए फालतू के डिटेल्स को ये हटा देता है।
इसका उपयोग वहां होता है जहाँ इंटरनेट स्ट्रीमिंग के दौरान कोई रुकावट न हो, इसलिए फोटो-वीडियो की Qualities कम हो जाती है।
- Photo Formats: jpeg, jpg, webp
- Video Formats: mp4, mkv
- Audio Formats: mp3, aac
Lossless Compression
इस तकनीक में फोटो का Size छोटा करने पर फोटो गुणवत्ता, रंग, प्रकाश आदि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, मतलब कम size में अच्छी क्वालिटी की फोटो। इससे स्टोरेज भी कम खपत होता है और परिणाम भी बेहतर होता है। इस फाइल को दोबारा पहले जैसा (Decompress) करने पर हमें फिर से मूल फाइल प्राप्त होती है।
ये डेटा में बार-बार दोहराए जाने वाले कोड पैटर्न को संक्षिप्त (छोटा) रूप में बदल देता है। जैसे उदाहरण के रूप में मूल फाइल है "FFFFFLLL", अब इसे compress करके 5F3L की तरह कर देगा। अगर दोबारा इसे decompress किया जाए तो हमें मूल फाइल FFFFFLLL प्राप्त हो जाती है। (इसमें 5 F है और 3 L)
इसका उपयोग text, documents, programming code, spreadsheet, medical reports आदि में होता है जहाँ 100% सटीकता अनिवार्य होती है।
- Photo Formats: png, gif
- Audio Formats: flac, alac
- File Archive: zip, rar, 7z
11. हर फाइल के अंत में Extension क्यों होता है?
Image, video, audio, documents, software इत्यादि के आखिर में दिखने वाले Extension जैसे file.jpg, file.png, file.mp3 आदि क्यों होते हैं?
दरअसल file Extension आपके ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे Android, Windows, iOS और apps को यह पहचानने का काम करता है कि फाइल का प्रकार क्या है। जैसे फोटो है कि वीडियो है या कोई ऑडियो या डॉक्यूमेंट।
जैसे ही ऑपरेटिंग सिस्टम फाइल के अंत में मान लीजिए .jpg देखता है तो वो पहचान लेता है कि ये फोटो है और इसे gallery में खोलना है और आपको वो फाइल photos folder या आपके फोन की gallery में मिलता है। वैसे ही बाकी files को भी पहचान कर खोलता है।
क्या Extension के बिना फाइल मेमोरी में save होगी?
हाँ! फाइल बिना file type के भी save रहती है। Memory का काम सिर्फ डेटा 0 और 1 को स्टोर करना है, उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि file के अंत में Extension है या नहीं। लेकिन फर्क operating system को पड़ेगा, system समझ नहीं पाएगा कि ये फोटो है या वीडियो। File unknown दिखेगी और बिना icon के खाली document जैसी दिखेगी, और खुलेगी नहीं। यदि आप दोबारा उस फाइल के अंत में extension लगा देंगे तो वो पहले जैसे खुलने लगेगी।
क्यों बिना Extension के File नहीं खुलती?
Extension हटा देने से Files के भीतर का डाटा वही रहता है, जैसे फोटो के अंदर Pixel, रंग, आदि। एक photo की फाइल में एक फोटो ही निवास करेगा, लेकिन हमारा ऑपरेटिंग सिस्टम खोलता क्यों नहीं? इसके कई कारण हैं।
एक उदाहरण से समझते हैं—
मान लीजिए आपके पास ढेर सारे बंद डिब्बे हैं। अगर प्रत्येक डिब्बे के बाहर एक extension के रूप में लेबल लगा है, जैसे एक काजू का, एक बादाम का, एक किशमिश का, एक चॉकलेट का, तो आप लेबल देखकर झट से पहचान जाएंगे कि डिब्बे में क्या है। वहीं अगर लेबल नहीं होगा तो हर डिब्बे को खोलकर देखना पड़ेगा।
ऐसे ही सिस्टम भी है, अगर ऑपरेटिंग सिस्टम file के अंत में extension देखता है तो तुरंत पहचान जाता है कि फाइल के अंदर क्या है। अगर extension नहीं होगा तो उसे भी फाइल खोलकर Codes पढ़ने पड़े तो आपका फाइल मैनेजर या गैलरी Hang हो जाएगा।
Computer के लिए सब कुछ 0 और 1 है
कंप्यूटर की मेमोरी को यह समझ नहीं आता कि फोटो क्या होता है, उसके लिए हर फोटो एक Binary Code है जैसे 01101001 01101101 0...। एक टेक्स्ट document, mp3 गाना और एक फोटो, तीनों मेमोरी में एक ही तरह से स्टोर होते हैं।
जब तक कोई ऐप उस बाइनरी data को सही तरीके से decode न करे, तब तक Operating System को वह सिर्फ संख्याओं की एक लिस्ट लगती है। एक्सटेंशन ऑपरेटिंग सिस्टम को बताता है कि उस बाइनरी कोड को पढ़ने के लिए किस decoder app की आवश्यकता है।
सुरक्षा (Security & Malware)
Security का एक महत्वपूर्ण नियम है कि जब तक पता नहीं हो कि फाइल क्या है, उसे मत छुओ। यदि कोई हैकर किसी वायरस या हानिकारक कोड वाली फाइल का एक्सटेंशन हटा दे और Operating System अपने आप पहचानकर file चलाने की कोशिश करे, तो सिस्टम हैक हो जाएगा।
इसलिए Operating System अनजान फाइल को खुद से खोलने से मना कर देता है और उसे ”Unknown File” बनाकर छोड़ देता है ताकि यूजर जब तक खुद न बताए या ऐप न चुने तब तक वह फाइल न चले।

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