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Why Price End In 9? कम्पनियाँ सामानों के दाम 200 के बजाय 199 क्यों रखती है?

ऑनलाइन स्टोर हो चाहे कोई Shopping Mall, प्रत्येक जगह Price Tag में नम्बर डिजिट 9, 8, 5, 7 से खत्म होते दिखेगा। जैसे- 99, 199, 999, 298, 195, 397 आदि। 100, 200, 500, 1000 के Price tag ना के बराबर देखने को मिलेंगे। प्राइज हमेशा 199, 1999 ही क्यों? कीमत पूरे 200, 500 क्यों नहीं होता है?


A retail store display featuring clothing items on hangers, with clear white price tags prominently attached: a blue t-shirt tagged at ₹199, a brown plaid shirt tagged at ₹299, and a denim jacket tagged at ₹1,999. In the background above the clothes, a small chalkboard displays the word "WHY?".
प्रतीकात्मक फोटो/ AI Generated


कीमत तय करने का मनोवैज्ञानिक कारण

ऐसी कीमतें तय करने का एक मुख्य कारण मनोविज्ञान है। कीमत तय करने के लिए बड़े शॉपिंग मॉल्स या ऑनलाइन ईकॉमर्स साइट्स कुछ खास नम्बरों का प्रयोग करते हैं, ये नम्बर्स कीमतों के आखिर में देखने को मिलती हैं। जिन्हें Odd Numbers कहते हैं। ये नम्बर्स 5, 7, 8, 9 होते हैं जो हमें कीमतों के आखिर में देखने को मिलती हैं। जैसे- ₹195, ₹298, ₹399 आदि। 


Charm Pricing या Left Digit Effect

Left digit effect: हमारा दिमाग नम्बर्स को बाएँ से दाएँ की ओर पढ़ता है। उदाहरण के लिेए 299 में हम नम्बर्स को जब बाएँ से दाएँ की ओर पढ़ेंगे तो हमको पहले 2 दिखेगा जो 200 रुपये का एहसास कराएगा, भले ही प्रोडक्ट 300 रुपये से 1 रुपये कम ही कम हो।

₹199 vs. ₹200:

Product Price: 200 में दो शून्य है और एक दो है, दो शून्य के कारण नम्बर कॉम्बिनेशन कुछ खाली सा लगता है और 2, 1 से बड़ा भी है। अब 195 या 199 को देखें तो इसमें शून्य (Zero) नही है, नम्बर कॉम्बिनेशन भरा सा लगता है और सस्ता होने का भ्रम होता है, और 199 में 1 अंक 2 से छोटा भी है।

₹1,999 vs. ₹2,000:

2000 रेंज के number को 1,999 कर देने पर ये 1,000 रेंज के नंबर में हो जाता है, और 1, 2 से छोटा भी है। हम Left digit bias की वज़ह से Numbers को Left to right यानी बाएँ से दाएँ पढ़ते हैं और बायीं तरफ हमें 2 की जगह 1 लिखा मिलता है और वो 1000 की रेंज में चला जाता है और सस्ता जान पड़ता है।

इन नम्बरों से कोई खास असर नहीं पड़ता, लेकिन ये कीमतें देखनें में सस्ती लगती हैं और लोगों को आकर्षित करती हैं। लोग 200, 400 को रेगुलर कीमत समझते हैं और 199. 399 को बचत की कीमत समझ लेते हैं।


Change system (Register Entry)

पुराने टाइम में जब ऑनलाइन प्रणाली नहीं थी और जब ग्राहक मान लीजिए पूरे 100 रुपये देता था तो कैशियर बिना रजिस्टर में प्रविष्टि किए पैसे रख सकता था जिससे चोरी का डर रहता था। लेकिन वहीं अगर ग्राहक पूरे 100 रुपये देता था और सामान 99 रुपये का होता था तो कैशियर को 1 रुपये ग्राहक को वापर करने पड़ते थे जिसके लिए उसे रजिस्टर खोलना पड़ता था और उसमें प्रविष्टि दर्ज करनी पड़ती थी, इस तरह चोरी का डर कम होता था।

 

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